Tuesday, May 15, 2007

तड़पते हैं ना रोते हैं ना हम फरियाद करते हैं / हैदर अली आतिश

तड़पते हैं ना रोते हैं ना हम फरियाद करते हैं
सनम की याद में हरदम खुदा को याद करते हैं

उन्हीं के इश्क में हम नाला -ओ -फरियाद करते हैं
इलाही देखिए किस दिन हमें वो याद करते हैं

[नाला = ज़ोर से रोना ]

शब् -ए -फुरकत में क्या-क्या सांप लहराते हैं सीने पर
तुम्हारी काकुल -ए -पेचां को जब हम याद करते हैं

[शब् -ए -फुरकत = जुदाई कि रात ; काकुल -ए -पेचां = घुंघराले बाल ]

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home

Get this widget | Share | Track details